स्वाभिमानी कास्तकार सोनू भगत को कलम लक

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स्वाभिमानी कास्तकार सोनू भगत को कलम लक

!! स्वाभिमानी कास्तकार !!


मोरा दुय लेकरू,अना बायको असो मोरो परिवार।

मेहनत, मजदूरी, खेती लका चलसे मोरो संसार।।


कपट, कर्म, चोरी, हिंसा नही मोरा संस्कार।

प्रेम, करुणा, दया, मोरो जिवन का आधार।।


धर्म, राष्ट्रप्रेम, अना मातृभुमी लका से मोला प्यार।

इतिहास को स्वर्णिम पन्ना वा मोरी जात पोवार।।


दुय रोटी मेहनत की यकोमा सुखी मोरो परिवार।

प्रेम, अहिंसा, स्वाभिमान आमरो अलंकार।।१।।


खेती मोरो पेशा नही; मी कलमकार।

साधो सरल जिवन मोरो, मी एक कास्तकार।।


आर्थिक परस्थिती मोरी लाचार।

सत्य, धर्म को मार्ग पर च भेटे मला परमार्थ।।


आस्तिक मी, मोरा शुद्ध विचार।

सृष्टीरचयिता ला हरदिन करुसु प्रत: नमस्कार।।


विक्रमादित्य, राजा भोज मोरा प्रेरनास्थान। 

हरदम चलू मी धर्म को मार्ग पर असो दे माता गढकालिका मोला वरदाण।।२।।



 सोनू भगत 

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