लहानपन का संगी

Total Views : 143
Zoom In Zoom Out Read Later Print

लहानपन का संगी

* लहानपन का संगी *

लहानपन का संगी होता मोठा बाका
खेलजन संगच शाळामालक आयोलका
कोणीलाच 'अबे' कवणला देत नवता मौका
गरो मा हात टाकक्यान घुमत होता गावभर
नव बजे कि पिच्चर देखन जागत होता रातभर
छुट्टी को दिवसमा बांदीलक आवत होता फिरकर
हिवाळोमा बोरी झोळन ला जात होता संगमाच
कोनी धावत होता त परात होता सिधा घरमाच
पढाई मा होता ढ, दो दुनी कवत होता पाच
शिक्या आमी सबजन गावकोच शाळा मा
बहुत प्रेम होतो तब को गुरुजी ना बाईजी मा
दिवसच अलग होता, सांगणो से आखरी मा


*******************
महेंद्र राहांगडाले
मु.मच्छेरा, ता.तुमसर, जि.भंडारा
मो क्र.९४०५७२९३१६

See More

Latest Photos

Share via Whatsapp