मामा को बिह्या मा महत्व

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मामा को बिह्या मा महत्व, काल्पनिक नोहोय, सत्य, सामाजिक, धार्मिक अना विज्ञान की बात आय .

         मामा सारखो पवित्र हूरदय भास्या, भासी को संदर्भ मा संसार मा जेवढो माय बाप को नही रवो वोतो मामा को रवसे म्हणून त मामा भास्या, भासी को चरण को पानी पिवसे......

         भास्या, भासी को प्रति मामा को मन बहुत ही पवित्र रवसे. ममाय को बादमा जो ममता रवसे वा मामा की च रवसे.... मामा=माय की ममता को उगम जिंज्या रवसे ओलाच मामा कव सेती.....!!!

         बिह्या मा मामा च काहे अंतरपाट धरसे वोको सामाजिक, धार्मिक आना वैज्ञानिक कारण मी खाल्या देय रही सेव .......


सामाजिक कारण :-  भास्या, भासी को प्रति मामा को मन बहुत ही पवित्र रवसे, बिह्या मा नवरदेव ना नवरी किंवा असो बी टूरा, टूरी को मूल नाल या मामा को च घरकी रवसे ना या बात सत्य से, येला कोणतोच पंथ धर्म ना समुदाय नकार नही सक.....जब वरी दुयी पक्ष का मूल नाळ का व्यक्ती नही रवत तब् वरी बिह्या ला काही महत्व नही रव कारण, कोणतो बी जोड जोडणको से त मूल नाल जुडे पाहिजे तब् च पक्को रिसता तय होसे ना पक्को समज सेती

        वोको साठी मामा लोक अंतरपाट धरसेती (बिना मामा को बिह्या नियमबाह्य होसे) 


 धार्मिक कारण :-बिह्या येव संसार को एक पवित्र बंधन आय. दुय परिवार को मिलन बिह्या लका होसे. मिलनसाठी दुयी मूल नाळ को पवित्र रवनो जरुरी से. मामा एक असो प्राणी से की, जेको पवित्र हुरदय लका बिह्या बिह्या को समय साक्षात ईश्वर को सानिध्य प्राप्त होसे ना रवसे. जब संसार को सब प्राणी हीनला ईश्वर न निर्माण करी सेस त वोकी माया केती रहे.....????या गोष्ट कोनीन जानीसेस का????मामा मा माय की ममता ना ईश्वर नाता को कृपाप्रसाद रवसे......समय पर सखो मामा नही रव त कुऱ्या को तरी माणूस ठेवसे कारण वू कुऱ्या को रवसे......वोन च खुम को रवसे.....बिह्या पवित्र बंधन आय, मामा को हातमा जो अंतरपाट रवसे ....वोय मामा को हातमा ....ईश्वर आपली शुभकामना देसे  ......म्हणून मामा को महत्व से...


 वैज्ञानिक कारण :-जब कोनी बी व्यक्ती पवित्र हुरदय लका कोनतो बी कर (हात) लका कोणती बी कपडा की वस्तू धरस्याणी ठेवसे तब् गुरुत्वाकर्षण, भौतिक सक्ती को उत्पत्ती होसे.....वोन सक्ती लका ऊर्जा लका एक विशिष्ट पद्धती लका जीनको मस्तिक. डोकसा पर जो वैवाहिक तागा रवसे, नवरा -नवरी ला जो हरद लगी रवसे वोको लका रासायनिक क्रिया होयकना अदभूत सक्ती को संचार होसे. म्हणून बहुत गन लोक कसेत का , बिह्या होये पर सुधर से, किंवा टूरा-टूरी को मानसिक स्तर पर विकास होसे कसेत.  येन सक्ती को संचार फक्त मामा को कपडा धरे लका च होसे , कारण वोको येतो पवित्र मन बिह्या मा कोनिको को नही रवो, कारण वू मूल नाल आय .....


     म्हणून त पहिले टूरा-टूरी ला नाव को बादमा मामा कहा का  आती म्हणून बिचारसेती ....खरी बात आय का नही....


        अंत मा .......

 मामा...ममता को फुल आय

पारिवारिक ...समता को मूल आय

कवी:- देवेंद्र चौधरी

         रा-सहकार नगर तिरोडा

         जिल्हा-गोंदिया (महाराष्ट्र)

तारीख:-०३/०१/२०१९

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